अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं की देश की आज़ादी में संघ का संघ के लोगों का क्या योगदान था ? जब भी किसी को वह योगदान बताये जाते हैं तो वह लोग उसका रिफरेन्स या सबूत मांगते हैं | इस ब्लॉग में मैंने २१ तथ्य सबूतों (सोर्स) के साथ साझा किये हैं जिसमे यह विवरण है की संघ का आज़ादी की लड़ाई में क्या योगदान था -
- डॉ हेडगेवार जी ने 16 वर्ष की आयु में युवाओं में राष्ट्रीय घटनाओं पर चर्चा और क्रांतिकारी गुणों के विकास के लिए 1901 में चर्चा मण्डल “देशबंधु समाज“ की शुरुआत की ।Reference- (आर्म्ड स्ट्रगल फ़ॉर फ्रीडम , पृष्ठ 372 -बी एस हरदास )
- डॉ हेडगेवार जी को, स्कूल में, अंग्रेज अफसर के निरीक्षण के समय “वन्देमातरम”के नारे लगवाने , नागपुर के मॉरिस कालेज सहित 2000 छात्रों की हड़ताल कराने पर सर रेजिंलेण्ड क्रडोक के निर्देश पर पुलिस महानिरीक्षक सीआर क्लीवलैंड की अनुशंसा पर स्कूल से निष्काषित कर दिया गया थ ।
- 1908 में दशहरे के समय रामपायली गांव मे सीमोलंघन कार्यक्रम मे हेडगेवार ने कहा कि-"सबसे बड़ी शर्मनाक बात हमारा परतंत्र होना है,अंग्रेजों को सात समुंदर पार भेज देना ही सही मायने में सीमोलंघन कहा जाएगा|"इसलिए उनपर अंग्रेजी हुकूमत ने 'राजद्रोह' का मुकदमा दर्ज करा दिया
- डॉ हेडगेवार जी का नाम उनकी देशभक्ति को देखकर क्रांतिकारी संगठन “अनुशीलन समिति“ में जोड़ा गया था Reference - ( चक्रबर्ती ,थर्टी इयर्स इन प्रिजन पृष्ठ 277-78 अल्फा बिटा प्रकाशन कलकत्ता 1963)
- डॉ हेडगेवार क्रांतिकारियों में “कोकेन ” के नाम से जाने जाते थे ,ओर “एनाटोमी”,उनके शस्त्र का छद्म नाम था ,क्रांतिकारियों में उनका सम्मान था ।(Ref -जोगेश चन्द्र चटर्जी ,इन सर्च ऑफ फ्रीडम पृष्ठ 27)
- रासबिहारी बोस, विपिनचन्द्र पाल, से डॉ हेडगेवार का परिचय था ,हरदास ने उनके बारे में लिखा है कि अपनी देशभक्ति,संगठन कौशल,सात्विक चरित्र से हेडगेवार जी ने क्रांतिकारियों का दिल जीत लिया था । (Source -बालशास्त्री हरदास आर्म्ड स्ट्रुगल फ़ॉर फ्रीडम पृष्ठ 373 )
- डॉ हेडगेवार बंगाल और मध्यप्रान्त के क्रांतिकारियों के बीच की कड़ी थे और नागपुर में शस्त्र छिपाकर लाया करते थे । (पढ़ें- जीवी केतकर रनझुनकर पी सी खान खोजे यांचा चरित्र पृष्ठ 12 )
- राष्ट्रीय मेडिकल कालेजो के छात्रों की क्रांतिकारी भूमिका के कारण यहां की डिग्री अमान्य करने के कारण ,नागपुर में डॉ हेडगेवार ने इस बिल के विरोध में प्रस्ताव पारित कराया जिससे अंग्रेजो को अपना निर्णय वापिस लेना पड़ा । (Source -हितवाद 12 फरवरी 1916 पृष्ठ 7)
- डॉ हेडगेवार जी ने प्रथम विश्वयुद्ध के समय अंग्रेजी सेना में युवकों की भर्ती का विरोध किया और जनजागरण किया । (पढ़ें -हितवाद 29 जून 1918 पृष्ठ 7)
- डॉ हेडगेवार असहयोग आंदोलन में कांग्रेस की नागपुर आंदोलन समिति में रहे और 11 नवम्बर 1920 से एक सप्ताह “असहयोग सप्ताह “के रूप में आयोजित कर सरकार के राजस्व को खत्म करने के लिए नशाबंदी आंदोलन चलाया |( Source:- “महाराष्ट्र” , 2 फरवरी 1921)
- डॉ हेडगेवार के आमसभाओं में भाग लेने पर अंग्रेजी कोर्ट के निर्देष पर जिला अधीक्षक जेम्स इरविन के साईंन से नोटिस दिया गया, लेकिन डॉ हेडगेवार ने खुला उल्लंघन किया । (Source- महाराष्ट्र 20 अप्रेल 1921 पृष्ठ 7)
- डॉ हेडगेवार पर अक्टूबर 1920 में काटोल ओर भारतवाड़ा की सभाओं में अंग्रेज विरोधी भड़काऊ भाषणों ओर 1908 के उग्र लेखन को लेकर आईपीसी धारा 108 के अंतर्गत मई 1921 में राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया| उन्होने अपनी पैरवी स्वयं की, उन्हें 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा हुई।
- डॉ हेडगेवार ने जेल में भी अनेक कष्ट झेलते हुए धर्म की जागृति की ,गीता महाभारत का पाठ बंदी साथियो को सुनाया और जलियावालाबाग हत्याकांड के विरोध में हड़ताल की ,11जुलाई1922 को जेल से रिहा हुए। पढ़ें-फाइल नं 28 /1921 राजनीतिक भाग 1 पेरा 17 राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली
- डॉ हेडगेवार ने जेल से बाहर आकर “स्वातंत्र्य” नामक समाचार पत्र का सम्पादन किया और अंग्रेजो के खिलाफ मोर्चा खोल दिया पत्र की पाठक संख्या 1200 हो गयी ।
- डॉ हेडगेवार ने पूर्ण स्वतंत्रता की मांग , साइमन कमीशन का विरोध, सविनय अवज्ञा आंदोलन ,जंगल सत्याग्रह ,पुसद सत्याग्रह में भाग लिया 21जुलाई 1931 को पुनः गिरफ्तार कर आईपीसी की धारा 117 के अंतर्गत उन पर मुकदमा चलाया गया और फिर से 9 महीने के सश्रम कारावास की सजा हुई ।
- संघ को मिले समर्थन को देखकर सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की शाखा में जाने पर अंग्रेजो ने रोक लगा दी थी ।(Source -फाइल 88/33 ग्रह(राजनीतिक) राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली)
- 20 दिसम्बर 1933 को अंग्रेजी मध्य भारत सरकार के स्थानिय स्वशासन विभाग ने नोटिस जारी संघ के कार्यक्रमो को रोकने की कार्यवाही की | (Source -,हितवाद 21 दिसम्बर 1933 पृष्ठ 5 )
- डॉ हेडगेवार जी के नेतृत्व में संघ के सामाजिक कार्यो से प्रेरित होकर संघ के समर्थन में नागपुर नगर पालिका ने 10 मार्च 1921 समर्थन भी पारित किया । नागपुर में 30 दिसम्बर 1938 को संघ के कार्यक्रम में 15000 से अधिक लोग उपस्थित थे | (Source- केसरी 5 जनवरी 1939 )
- संघ ने अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की हत्या के बाद क्रांतिकारी राजगुरु को भूमिगत रहने मे सहायता प्रदान की थीं । (Source -HM घोड़के ,रिवोल्यूशनरी नेशनलिज्म इन वेस्टर्न इंडिया पृष्ठ 173-174)
- संघ के एक सैनिक संगठन की तरह प्रशिक्षण देने से अंग्रेज चिंतित थे । ( फाइल संख्या 28/08/42 गृह विभाग (I) राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली)
- बाला साहेब देवरस भी अंग्रेजो के विरुद्ध गुप्त रूप से संगठन कर रहे थे | (पढ़ें-केशव स्मरामि सदा (खण्ड 1) पृष्ठ 11-12 सुरुचि साहित्य )
-संकलनकर्ता
शुभम वर्मा

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