-आर्य शुभम वर्मा
कई सालों से यह बात
सुनने में आ रही थी के भारतीय पेड़ पौधों और जड़ी बूटियों को विदेशी उनके नाम से
पेटेंट करवा रहे हैं तथा उसके बाद हमारी ही चीजे हमें ही बेचकर चले जाते हैं | कई
जगह पर ये बाते भी चल रही थीं के अमेरिका ने हमारे नीम, हल्दी और बासमती को पेटेंट
करवा लिया है | इन सभी बातों को लेकर मेरे मन में भी यह सवाल उठे के इस तरह तो
भारत की सभी प्राकृतिक सम्पदा विदेशियों के हाथों में चली जायेगी ,पर एक शोधकर्ता होने
के कारण मैंने पहले यह जानने की कोशिश की के इन बातों में कितनी सच्चाई है और क्या
भारत सरकार इनके लिए कुछ कर रही है ? यही सब पता करने के लिए मैंने थोडा रिसर्च
किया और जो पता चला उसे जानकर आपको भी अपनी सरकार पर गर्व होगा |
यह बात बिलकुल सही है की विदेशियों ने हमारे नीम, हल्दी और बासमती चावल पर
पेटेंट करवा लिया था पर इसके बाद भारत सरकार ने United States Patent and Trademark Office (USPTO) में केस लड़कर हल्दी और बासमती के पेटेंट को वापस जीत लिया
साथ ही European Patent Office (EPO) में केस लड़कर नीम का पेटेंट भी कैंसिल करवा दिया | तो यह
सब बातें जो फैलाई जाती हैं के नीम , हल्दी , बासमती भारत के नहीं रहे , यह अब
निराधार हो चुकीं हैं |
सिर्फ, यही नहीं आपको यह जानकर आश्चर्य तथा होगा के इसके तुरंत बाद भारत सरकार
ने यह निर्णय किया था के अब भारत के पारंपरिक ज्ञान को बाहर जाने से रोकना होगा | इसके
लिए अटल बिहारी वाजपेयी जी के समय १९९९ में हुआ जिसमे आयुष, सिद्धा , होमोपैथी और
अन्य , यूनानी , योग , आयुर्वेद आदि सब को मिलाकर एक कमिटी का गठन किया गया ,
जिसको भारत की सभी जड़ी बूटियों तथा पारंपरिक ज्ञान और पेड़ पौधों को पंजीकृत करने
का कार्य सौंपा गया |
२००१ में Traditional Knowledge
Digital Library (TKDL) प्रोजेक्ट को शुरू
किया गया जिसमे भारत के सभी प्रकार के पारंपरिक ज्ञान को पंजीकृत किया जा रहा है
तथा यही नहीं इस ज्ञान को दुनिया में कोई भी और देश पेटेंट नहीं करवा सकता | साथ
ही साथ जो पहले पेटेंट करवा ली गयी चीजें थी उन्हें भी भारत सरकार ने वापस भारत की
संपत्ति के तौर पर लेना शुरू कर दिया है तथा विदेशियों के कई पेटेंट कैंसिल करवा
दिये हैं |
Council of Scientific and Industrial Research (CSIR), Ministry of Science
and Technology and Department of AYUSH, Ministry of Health and Family Welfare के माध्यम से आज तक यह परियोजना चल रही है तथा इन्होने कई
तरह की भारतीय जड़ी बूटियों आदि को संरक्षित करने का बड़ा काम किया है | इनकी टीम
में कई वैज्ञानिक, आईटी के जानकार, तकनीकी लोग, डॉक्टर आदि हैं जो हर चीज की
बारीकी से जांच करते हैं |
इस आर्टिकल को लिखने के पीछे मेरी मंशा सिर्फ इतनी है के लोगों को यह पता चले
के भारत अब सपेरों का देश नहीं रहा है | हम भी दुनिया के अग्रणी देशों की बराबरी
पर खड़े हैं तथा हर मोर्चे पर इन्हें जवाब देने में सक्षम हैं अतः देश के बारे में
नकारात्मक बाते फैलाने से पहले एक बार स्वयं से उसे जांच लें के वह बात सच भी है
या नहीं |
चूँकि आजकल किसी भी बात को प्रूफ करने के लिए सोर्स देना पढता है अतः में यह लिंक
शेयर कर रहा हूँ जो टी.के.डी.एल. की है :
लेखक
आर्य शुभम वर्मा
theshubhamhindi@gmail.com


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