Wednesday, February 10, 2016

हिवरे बाजार – एक आदर्श ग्राम की कहानी


-शुभम वर्मा

1988 तक जिन सरकारी लोगों से सरकार खुश नहीं रहती थी , उन्हें परेशान करने के लिए उनका तबादला इस गाँव में कर दिया जाता था | यहाँ आये दिन मार-पीट और झगडे हुआ करते थे तथा आधे से ज्यादा युवा शराब और जुएँ की लत में फंसे हुए थे | हर तरफ गंदगी फैली रहती तथा अशिक्षा और बेरोजगारी अपने चरम पर थी – पोपट राव पवार (सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व सरपंच , हिवरे बाजार)

यह कहानी है महाराष्ट्र के अहमदनगर में बसे हिवरे बाजार गाँव की – यहाँ 1988 तक हालात इतने बुरे हो चुके थे के कोई यहाँ रहना नहीं चाहता था | पानी ना होने के कारण , खेती भी बर्बाद हो गयी थी | उसी समय वहां के एक पढ़े लिखे युवा पोपट राव, जिनकी रूचि क्रिकेट खेलने में थी तथा जो राष्ट्रीय स्तर तक कई क्रिकेट टूर्नामेंट खेल चुके थे , इन्होने अपने दोस्तों के साथ गाँव के हालात पर चर्चा की | सभी युवाओं का मानना था गाँव के लिए कुछ करना चाहिए , पर सवाल वही के बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा | बातों बातों में ही सभी ने तय कर लिया के पोपट राव पढ़े लिखे हैं , इन्ही को सरपंच बनाया जाय और सारे गाँव ने मिलकर पोपट राव को अपना सरपंच चुन लिया | अब पोपट राव जो क्रिकेट में रूचि रखते थे तथा पुणे से पढ़े थे , उन्हें समझ नहीं आ रहा था के क्या किया जाय ?


फोटो : हिवरे बाजार ग्राम सांसद , पोपट राव पवार ( दांये से दुसरे )

एक तरफ अपना पुराना पूरा कैरियर तथा दूसरी तरफ गाँव के लोगों का भरोसा और गाँव के लोगों का भरोसा , कैरियर पर भारी पढ़ा तथा पोपट राव ने गाँव को बदलने का मन बना लिया | पोपट राव ने देखा के गाँव में गंदगी, अशिक्षा , बेरोजगारी , पानी की कमी , शराब आदि समस्याए हैं | इन्हें बदलने के लिए यदि वो अकेले कार्य करेंगे तो लोग बात नहीं सुनेगे अतः उन्होंने महात्मा गाँधी का ग्राम स्वराज्य का रास्ता अपनाया तथा गाँव के सभी लोगों को बैठाकर ग्राम सभा बुलाई एवं गाँव की सारी  शक्ति ग्राम सभा को सौंप दी गयी | अब यदि कोई भी शिक्षक या ग्राम सेवक गाँव में देर से आता या छुट्टी मारता तो ग्राम सभा फैसला लेकर उसकी तनख्वाह कटवा देती अतः सभी सरकारी कर्मचारी ठीक समय पर काम करने लगे | गाँव के लिए आ रहे पूरे फण्ड का ब्यौरा गाँव की ग्राम पंचायत की दीवार पर लिखा जाने लगा जिसमे रोज कितना खर्चा हुआ और कहाँ गया यह सब लिखा जाने लगा | इससे गाँव वालों के मन में गाँव के प्रति अपनेपन की भावना का विकास हुआ तथा लोगों ने भी जनभागीदारी से गाँव के कामो में सहयोग देना शुरू कर दिया | अब समस्याए थी गंदगी, शराब , खेती, बेरोजगारी आदि |

चूँकि बूढ़े लोगों की आदतों को बदलना बहुत मुश्किल था अतः शुरुआत स्कुल के बच्चों के साथ की गयी | सबसे पहले जिस मुद्दे को चुना गया वह था ग्रामीण स्वच्छता | इस समय सारा गाँव खुले में शौच करने जाता था जिससे सारे गाँव में गंदगी होती थी तब स्कुल में शौचालय बनाके बच्चों को बंद कमरे में शौच करने की प्रेरणा दी गयी | जिन बच्चो को डर लगता था उनके लिए दरवाजे को आधा काट कर , नए तरह के दरवाजे विकसित किये गए जिनमे नीचे से बंद एवं ऊपर जाली लगी होती थी , जिससे छोटे बच्चों को अँधेरे कमरे में बैठने से डर नहीं लगता था | यह आदत बच्चों में पढने के बाद , गाँव को भी इस विषय पर जाग्रत किया गया तथा इसमें बच्चों के निगरानी दल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | यह दल सभी को खुले में शौच करने पर रोकता था तथा समझाता था | धीरे धीरे करके सारा गाँव खुले में शौच से मुक्त हो गया | पंचायत ने सरकार और लोगों की मदद से सभी घरों का शौचालय बनाने का इकठ्ठा सामान माँगा लिया एवं उससे सभी के घरों के शौचालय बनाने का काम शुरू हो गया तथा उसकी निगरानी का काम भी सारा गाँव करता था अतः कोई ठेकेदार पैसे खाना और मिलावट करने जैसे काम नहीं कर पाता था वर्ना ग्राम सभा में उसे सजा भुगतनी पढ़ती थी |


पोपट राव जी बताते हैं –गाँव में सारे शौचालय बनने के बाद भी एक बार गाँव के एक बुजुर्ग खुले में शौच के लिए चले गए | उनको शौच जाते देख उनका पोता उनके पीछे गया तथा उनके शौच करने के बाद उन्ही के सामने उस बच्चे ने उनके मल को स्वयं अपने हाथों से उठाकर पन्नी में भरा तथा मिटटी डालकर उसे कूड़ेदान में फेक कर आ गया | उसके इस काम को देखकर दादा को इतनी शर्मिंदगी महसूस हुई के उन्होंने फिर कभी खुले में शौच नहीं की | इसी तरह के कई उदाहरण बच्चों ने पेश किये जिससे ग्राम सभा में फैसला ले लिया गया के कोई खुले में शौच नहीं जाएगा तथा पुरे गाँव में कूड़ेदान लगा दिये गए एवं कही भी कचड़ा फेकने पर जुर्माना लगा दिया गया | यही नहीं बाद में गाँव में प्लास्टिक पर भी पाबन्दी लगा दी गयी | देखते ही देखते गाँव गन्दगी से मुक्त हो गया |

इसी तरह ग्राम पंचायत ने निर्णय लिया के शराब की दुकान भी गाँव में नहीं रहेगी | इस पर गाँव में बहुत चर्चा हुयी तथा अधिकतर लोगों, महिलाओं और बच्चों ने शराब बंदी के पक्ष में वोट किया और सभी लोगों को ग्राम पंचायत का निर्णय मानना पड़ा जिससे शराब बंदी और उसके कारण हो रही सट्टेबाजी भी गाँव से ख़त्म हो गयी | इसके बाद खेती की समस्या को दूर करने के लिए गाँव में जलसंचय का कार्य व्यापक स्तर पर किया गया | जिस गाँव में लोग पानी के लिए तरसते थे वहां सभी गाँव वालों ने मिलकर कई छोटे छोटे तालाब खोद दिये एवं पहाड़ पर भी पानी रोकने के लिए गड्ढे किये गए , जिससे जल का स्तर गाँव में बढ़ता चला गया | इसके अलावा गाँव के बच्चों ने गाँव के आस पास कई फलों के बीज बोये तथा उपयोगी पेड़ पौधों का रोपण किया इसके परिणाम स्वरुप, गाँव का जल स्तर काफी बढ़ गया तथा खेती में किसानो को फायदा होने लगा | अब इस गाँव में गौ पालन तथा दूध के उद्योग भी पनपने लगे तथा बेरोजगारी की समस्या भी हल हो गयी | आज इस गाँव में कोई भी व्यक्ति बेरोजगार नहीं है , ना ही यहाँ गंदगी है बल्कि यहाँ प्रति व्यक्ति साल में लाख रूपये तक कमाता है और समप्रदायिक सद्भावना इतनी है की- हिन्दुओं ने एकमात्र मुस्लिम परिवार के लिए एक मज्जिद बनाकर दी है | अब यहाँ पहले की तरह कोई लड़ाई झगडे भी नहीं होते | यह गाँव अपने सारे निर्णय ग्राम सभा करके लेता है तथा इसे आदर्श ग्राम के हजारों परुस्कार भारत सरकार से तथा दुनिया भर से मिले हैं |








हिवरे बाजार के अन्य रोचक निर्णय जो ग्राम सभा ने लिए हैं इस प्रकार हैं :-
  • गाँव की लड़की से जो भी बाहर वाला शादी करेगा उसका एच.आई.वी. टेस्ट होता है |
  • गाँव की जमीन कोई बाहर वाला बिना ग्राम सभा की इजाजत के नहीं खरीद सकता |
  • गाँव में सभी सरकारी कर्मचारियों , शिक्षकों आदि को ग्राम सभा को रिपोर्ट करना होता है |
  • गाँव में कोई शराब की दूकान नहीं खुल सकती |
  • छप्पर मुक्त अभियान से गाँव के हर घर में पक्की छत वाले मकान बना दिये गए |
  • फुकनी मुक्त अभियान के तहत बायो गैस तथा एलपीजी का प्रयोग गाँव में शुरू कर दिया गया |




अब गाँव वाले औषधिक पौधे लगाने का कार्य तेजी से कर रहे हैं | इनका लक्ष्य है २०२५ तक गाँव में एक भी मरीज नहीं होना चाहिए | पोपट राव जी के अनुसार अब तक गाँव में ३००० औषधिक पौधे रोपे जा चुके हैं |

गाँव के पूर्व सरपंच पोपट राव पवार कहते हैं – आज समग्र विकास की आवश्यकता है | किसी भी एक चीज को सुधारने से हल नहीं होगा | हमने जल संचय किया , उससे खेती में फायदा मिला , इससे पैसा आया जिससे लोगों ने अन्य व्यवसाय शुरू किये | ऐसे ही सफाई से एकजुटता आई | अतः सब कुछ एक दुसरे से जुड़ा हुआ है | हमें हर पहलू पर साथ में काम करना चाहिए जिससे गाँधी जी के ग्राम स्वराज्य का सपना सच हो सके |

सचमुच , यह गाँव एक जनभागीदारी के द्वारा काम करने का एक अदभुत नमूना है तथा गाँधी जी के ग्राम स्वराज्य के सपने को साकार करने वाला एक अदभुत उदाहरण है | इस गाँव के उदाहरण से देश भर के गाँव बहुत कुछ सीख सकते हैं |
शुभम वर्मा
(सामाजिक कार्यकर्ता)
theshubhamhindi@gmail.com



1 comment:

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