Thursday, March 17, 2016

"यदि कोई तुम्हे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो" - यह गाँधी ने नहीं कहा था | जानिए किसने कहा था ?

"यदि कोई तुम्हे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो"
यह बात महात्मा गाँधी ने नही कही थी | यह बात बाइबिल में लिखी है और यह शब्द जीसस क्राइस्ट के हैं |
जब महात्मा गाँधी ने आन्दोलनों में कदम रखा और पाया के अंग्रेज, गुलाम बनाये हुए देशों की जनता पर बहुत अत्याचार कर रहे हैं | तब उन्होंने अंग्रेजों के अन्यायपूर्ण शासन से लड़ने का फैसला किया | पर जब गांधीजी ने इस विषय के अध्ययन शुरू किया तो उन्होंने पाया के जब भी अंग्रेजों के विरुद्ध कोई हथियारबंद क्रांति या हिंसक लड़ाई की जाती है, तो , अंग्रेज उसे बुरी तरह से कुचल देते हैं क्योंकि वो सेना और हथियार की तकत में बहुत आगे हैं | इसी के साथ गांधीजी ने यह भी देखा के १८५७ की क्रांति से लेकर १९१५ तक अंग्रेजों ने कई क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया या गोली मार दी तथा अपने प्रचारतंत्र द्वारा दुनिया के सामने उन्ही लोगों को गलत साबित कर दिया के ये हिंसा करते थे |
इसलिए गाँधी जी ने उन्हें उन्ही की भाषा में जवाब देने की रणनीति अपनाई तथा अहिंसात्मक युद्ध शुरू कर दिया | वो अंग्रेजों के बनाये सारे कानून तोड़ते थे तथा अंग्रेजों के खिलाफ बोलते भी थे पर हिंसा नहीं करते थे और यदि अंग्रेज अहिंसक लोगों पर हमला करें या मारें तो मीडिया और दुनिया भर में अंग्रेजों की बहुत किरकिरी होती थी | इस तरह गाँधी जी ने अंग्रेजों को बहुत परेशान किया तथा देश भर में सारा माहौल अंग्रेजो के खिलाफ खड़ा कर दिया | इसके लिए उन्होंने चंपारण आन्दोलन , नील किसानो की लड़ाई, बारडोली आन्दोलन , सविनय अवज्ञा , असहयोग आन्दोलन , नमक कानून तोडना , भारत छोड़ो आन्दोलन आदि कई बड़े आन्दोलनों का सहारा लिया और अंग्रेजों को उन्ही के हथियार से मारा |
जब अंग्रेजों ने अहिंसा आन्दोलन को भी रोकने का प्रयास किया तब गाँधी जी ने उन्ही के धर्म की किताब से जीसस का यह वाक्य उन्ही के मुह पर मार दिया जिसमे लिखा था - "यदि कोई तुम्हे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो" और कहा ये अहिंसा तो जीसस कहते थे और अंग्रेज हमारे भारत में जीसस के विरुद्ध काम कर रहे हैं | इस बात से कई देशों के इसाई अंग्रेजों से गुस्सा हो गए तथा गाँधी के और भारत की आज़ादी के समर्थन में खड़े हो गए |
ऐसे थे हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गाँधी अतः हमें किसी भी स्वतंत्रता सेनानी को गलत नहीं समझना चाहिए भले ही उन्होंने देश को आज़ादी दिलाने के लिए जो भी रास्ता अख्तियार किया हो | कोई भी छोटा या बड़ा नहीं था | जिन भी लोगों ने देश की आज़ादी में अपना योगदान दिया उन सभी महानुभावों को हम नमन करते हैं |

-आर्य शुभम वर्मा
theshubhamhindi@gmail.com

Monday, March 14, 2016

भारत सरकार ने लगायी हानिकारक विदेशी दवाओं पर रोक |

३०० से अधिक हानिकारक दवाओं पर रोक |


भारत सरकार ने भारत के कई सालों से बिक रही हानिकारक विदेशी दवाओं पर रोक लगा दी है | अब भारत में यह दवाएं नहीं बिक सकेंगी | कई सालों से कई विदेशी कंपनियां हानिकारक दवाओं को भारत में बेच रही थीं जिससे बहुत से मरीजो को साइड इफ़ेक्ट तथा नुकसान होता था | इनमे से कई दवाओं पर तो उनके खुद के देशों में प्रतिबन्ध है फिर भी इस देश में वो दवाएं बेचीं जाती थी | 

कुछ सालों पहले जस्टिस हाथी कमीशन ने भी अपनी  रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था फिर भी इन दवाओं पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया था | मगर इस बार भारत सरकार ने कड़ा फैसला लेते हुए यह साफ़ कर दिया है के भारत की जनता के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा विदेशी कंपनी की दवाओं को भारत से बाहर का रास्ता दिखा दिया है |

- आर्य शुभम वर्मा 
theshubhamhindi@gmail.com 

मोदी सरकार ने IMF को रूपये का की कीमत कम करने से साफ़ इनकार किया |


IMF के सभी प्रयासों को धत बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दो टूक शब्दों में IMF लॉबी को साफ़ कर दिया के भारत किसी भी हालत में रूपये की कीमत का अवमूल्यन नहीं करेगा | यदि ग्लोबल इकॉनमी नीचे जा रही है तो इसके लिए भारत जिम्मेदार नहीं है , भारत अपने रूपये की कीमत खुद तय करेगा ना की कोई विदेशी देश |

हाल ही में IMF के दबाव में आकर चीन जैसे शक्तिशाली देश भी उनकी मुद्रा में अवमूल्यन कर चुके हैं तथा दुनिया भर के कई देश अपनी मुद्रा की कीमत को कम कर चुके हैं  | चीन के की मुद्रा युयान में इससे भारी गिरावट आई है | 

इससे पहले १९९१-१९९२ में कांग्रेस सरकार के समय भारत ने अपने रूपये की कीमत IMF के दबाव के कारण 18-19 % तक कम कर ली थी | जिसके बाद भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले काफी पिछड़ गयी तथा आज लगभग 70 रूपये तक पहुच गयी है |

पर प्रधानमंत्री मोदी ने साफ़ कर दिया के भारत रूपये का कोई अवमूल्यन नहीं करेगा तथा दुनिया के साथ व्यापार अपनी शर्तों पर करेगा | इस कदम के बाद कई छोटे देश अब भारत को उनके उभरते नेता के रूप में देख रहे हैं जो बड़े देशों के प्रभाव से उन्हें मुक्त करवा सकता है |

-आर्य शुभम वर्मा 


सोर्स :-http://wap.business-standard.com/article/economy-policy/modi-says-india-won-t-join-currency-devaluation-race-to-boost-trade-116031200869_1.html

अब भारत में सड़क पर बिकने वाला भोजन भी स्वच्छ होगा |


"क्लीन स्ट्रीट फ़ूड" प्रोजेक्ट 

स्वास्थ्य मंत्रालय  की  नयी  योजना  के तहत भारत सरकार सड़क के  किनारे बिकने वाले भोजन और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता  की  ओर ध्यान दे रही है | कई सालों से यह कहा जा रहा था के सड़क के किनारे बिकने वाले पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं तथा इन्हें बेचने वाले हाथ नहीं धोते या गंदगी से खाना बनाते हैं | इसी का फायदा उठाते हुए कई विदेशी कंपनियों ने पैक्ड फ़ूड बेचना शुरू कर दिया था , जिसके कारण कई गरीब हाथ ठेले वाले तथा सड़क किनारे खाद्य पदार्थ बेचने वालों को बहुत नुकसान हुआ था तथा कई गरीब लोग बेरोजगार हो  गए थे |

सरकार ने इस तरफ ध्यान देते हुए इस बार दिल्ली से पायलट प्रोजेक्ट स्टार्ट किया है जिसमे सबसे पहले २०,००० सड़क किनारे खाद्य पदार्थ बेचने वालों को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दी जाएगी फिर उन्हें गुणवत्ता के आधार पर प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेंगे | यदि यह सफल रहा तथा सब ठीक रहा तो सारे देश में इसी तरह  के कार्यक्रम चलेंगे |

भारत सरकार की स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह एक सराहनीय पहल  है | जिसके द्वारा सभी को अच्छे स्तर के खाद्य पदार्थ मिल सकेंगे |

-आर्य शुभम वर्मा 

Tuesday, March 1, 2016

हल्दी,नीम , बासमती के पेटेंट भारत ने वापस ले लिए हैं !!


-आर्य शुभम वर्मा
ई सालों से यह बात सुनने में आ रही थी के भारतीय पेड़ पौधों और जड़ी बूटियों को विदेशी उनके नाम से पेटेंट करवा रहे हैं तथा उसके बाद हमारी ही चीजे हमें ही बेचकर चले जाते हैं | कई जगह पर ये बाते भी चल रही थीं के अमेरिका ने हमारे नीम, हल्दी और बासमती को पेटेंट करवा लिया है | इन सभी बातों को लेकर मेरे मन में भी यह सवाल उठे के इस तरह तो भारत की सभी प्राकृतिक सम्पदा विदेशियों के हाथों में चली जायेगी ,पर एक शोधकर्ता होने के कारण मैंने पहले यह जानने की कोशिश की के इन बातों में कितनी सच्चाई है और क्या भारत सरकार इनके लिए कुछ कर रही है ? यही सब पता करने के लिए मैंने थोडा रिसर्च किया और जो पता चला उसे जानकर आपको भी अपनी सरकार पर गर्व होगा |


यह बात बिलकुल सही है की विदेशियों ने हमारे नीम, हल्दी और बासमती चावल पर पेटेंट करवा लिया था पर इसके बाद भारत सरकार ने United States Patent and Trademark Office (USPTO) में केस लड़कर हल्दी और बासमती के पेटेंट को वापस जीत लिया साथ ही  European Patent Office (EPO) में केस लड़कर नीम का पेटेंट भी कैंसिल करवा दिया | तो यह सब बातें जो फैलाई जाती हैं के नीम , हल्दी , बासमती भारत के नहीं रहे , यह अब निराधार हो चुकीं हैं |

सिर्फ, यही नहीं आपको यह जानकर आश्चर्य तथा होगा के इसके तुरंत बाद भारत सरकार ने यह निर्णय किया था के अब भारत के पारंपरिक ज्ञान को बाहर जाने से रोकना होगा | इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी जी के समय १९९९ में हुआ जिसमे आयुष, सिद्धा , होमोपैथी और अन्य , यूनानी , योग , आयुर्वेद आदि सब को मिलाकर एक कमिटी का गठन किया गया , जिसको भारत की सभी जड़ी बूटियों तथा पारंपरिक ज्ञान और पेड़ पौधों को पंजीकृत करने का कार्य सौंपा गया |

२००१ में Traditional Knowledge Digital Library (TKDL) प्रोजेक्ट को शुरू किया गया जिसमे भारत के सभी प्रकार के पारंपरिक ज्ञान को पंजीकृत किया जा रहा है तथा यही नहीं इस ज्ञान को दुनिया में कोई भी और देश पेटेंट नहीं करवा सकता | साथ ही साथ जो पहले पेटेंट करवा ली गयी चीजें थी उन्हें भी भारत सरकार ने वापस भारत की संपत्ति के तौर पर लेना शुरू कर दिया है तथा विदेशियों के कई पेटेंट कैंसिल करवा दिये हैं |

Council of Scientific and Industrial Research (CSIR), Ministry of Science and Technology and Department of AYUSH, Ministry of Health and Family Welfare के माध्यम से आज तक यह परियोजना चल रही है तथा इन्होने कई तरह की भारतीय जड़ी बूटियों आदि को संरक्षित करने का बड़ा काम किया है | इनकी टीम में कई वैज्ञानिक, आईटी के जानकार, तकनीकी लोग, डॉक्टर आदि हैं जो हर चीज की बारीकी से जांच करते हैं |

इस आर्टिकल को लिखने के पीछे मेरी मंशा सिर्फ इतनी है के लोगों को यह पता चले के भारत अब सपेरों का देश नहीं रहा है | हम भी दुनिया के अग्रणी देशों की बराबरी पर खड़े हैं तथा हर मोर्चे पर इन्हें जवाब देने में सक्षम हैं अतः देश के बारे में नकारात्मक बाते फैलाने से पहले एक बार स्वयं से उसे जांच लें के वह बात सच भी है या नहीं |

चूँकि आजकल किसी भी बात को प्रूफ करने के लिए सोर्स देना पढता है अतः में यह लिंक शेयर कर रहा हूँ जो टी.के.डी.एल. की है :


लेखक
आर्य शुभम वर्मा
theshubhamhindi@gmail.com