"यदि कोई तुम्हे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो"
जब महात्मा गाँधी ने आन्दोलनों में कदम रखा और पाया के अंग्रेज, गुलाम बनाये हुए देशों की जनता पर बहुत अत्याचार कर रहे हैं | तब उन्होंने अंग्रेजों के अन्यायपूर्ण शासन से लड़ने का फैसला किया | पर जब गांधीजी ने इस विषय के अध्ययन शुरू किया तो उन्होंने पाया के जब भी अंग्रेजों के विरुद्ध कोई हथियारबंद क्रांति या हिंसक लड़ाई की जाती है, तो , अंग्रेज उसे बुरी तरह से कुचल देते हैं क्योंकि वो सेना और हथियार की तकत में बहुत आगे हैं | इसी के साथ गांधीजी ने यह भी देखा के १८५७ की क्रांति से लेकर १९१५ तक अंग्रेजों ने कई क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया या गोली मार दी तथा अपने प्रचारतंत्र द्वारा दुनिया के सामने उन्ही लोगों को गलत साबित कर दिया के ये हिंसा करते थे |
इसलिए गाँधी जी ने उन्हें उन्ही की भाषा में जवाब देने की रणनीति अपनाई तथा अहिंसात्मक युद्ध शुरू कर दिया | वो अंग्रेजों के बनाये सारे कानून तोड़ते थे तथा अंग्रेजों के खिलाफ बोलते भी थे पर हिंसा नहीं करते थे और यदि अंग्रेज अहिंसक लोगों पर हमला करें या मारें तो मीडिया और दुनिया भर में अंग्रेजों की बहुत किरकिरी होती थी | इस तरह गाँधी जी ने अंग्रेजों को बहुत परेशान किया तथा देश भर में सारा माहौल अंग्रेजो के खिलाफ खड़ा कर दिया | इसके लिए उन्होंने चंपारण आन्दोलन , नील किसानो की लड़ाई, बारडोली आन्दोलन , सविनय अवज्ञा , असहयोग आन्दोलन , नमक कानून तोडना , भारत छोड़ो आन्दोलन आदि कई बड़े आन्दोलनों का सहारा लिया और अंग्रेजों को उन्ही के हथियार से मारा |
जब अंग्रेजों ने अहिंसा आन्दोलन को भी रोकने का प्रयास किया तब गाँधी जी ने उन्ही के धर्म की किताब से जीसस का यह वाक्य उन्ही के मुह पर मार दिया जिसमे लिखा था - "यदि कोई तुम्हे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो" और कहा ये अहिंसा तो जीसस कहते थे और अंग्रेज हमारे भारत में जीसस के विरुद्ध काम कर रहे हैं | इस बात से कई देशों के इसाई अंग्रेजों से गुस्सा हो गए तथा गाँधी के और भारत की आज़ादी के समर्थन में खड़े हो गए |
ऐसे थे हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गाँधी अतः हमें किसी भी स्वतंत्रता सेनानी को गलत नहीं समझना चाहिए भले ही उन्होंने देश को आज़ादी दिलाने के लिए जो भी रास्ता अख्तियार किया हो | कोई भी छोटा या बड़ा नहीं था | जिन भी लोगों ने देश की आज़ादी में अपना योगदान दिया उन सभी महानुभावों को हम नमन करते हैं |
-आर्य शुभम वर्मा
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